धाम की स्थापना का कारण:
यहाँ संतों की एक सभा आयोजित की गई थी, जिसमें इस विषय पर चर्चा हुई कि ईश्वर की प्राप्ति कैसे हो सकती है। अग्रदेव जी ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि यह केवल भगवान की कृपा से ही संभव है। सभा ने उन्हें अपने दावे को साबित करने के लिए कहा। इस पर अग्रदेव जी ने अपने आराध्य देव से प्रार्थना की, और भगवान राम की पत्नी माता जानकी (सीता जी) वहाँ प्रकट हुईं, जिससे सभी संशयवादी स्तब्ध रह गए। इसके बाद अग्रदेव जी ने इस मंदिर की स्थापना की।
अग्रदेव जी की प्रार्थना पर माता सीता जी अकेले प्रकट हुई थीं। इस चमत्कार के कारण इस मंदिर और यहाँ की मूर्ति का विशेष महत्व है।
परम पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज वर्तमान में श्री मलूक पीठ, वृंदावन तथा श्री अग्रपीठ, रैवासा धाम (राजस्थान) के पीठाधीश्वर हैं । वे एक प्रभावशाली आध्यात्मिक संत, कथावाचक, और सनातन धर्म के प्रचारक हैं। महाराज जी का जीवन भक्ति, ज्ञान और सेवा का अद्भुत संगम है, जो लाखों लोगों को प्रेरणा प्रदान करता है। वे श्री रामानंद संप्रदाय की परमपरा से दीक्षित हैं ।
परम पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज वर्तमान में श्री मलूक पीठ, वृंदावन तथा श्री अग्रपीठ, रैवासा धाम (राजस्थान) के पीठाधीश्वर हैं । वे एक प्रभावशाली आध्यात्मिक संत, कथावाचक, और सनातन धर्म के प्रचारक हैं। महाराज जी का जीवन भक्ति, ज्ञान और सेवा का अद्भुत संगम है, जो लाखों लोगों को प्रेरणा प्रदान करता है। वे श्री रामानंद संप्रदाय की परमपरा से दीक्षित हैं ।रैवासा धाम राजस्थान के सीकर जिले में अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है । इसे पहले कोटड़ा गांव के नाम से जाना जाता था ।
आज रैवासा धाम श्री राजेंद्र दास जी महाराज के नेतृत्व में एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है। यहाँ हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत जैसी बड़ी हस्तियाँ आ चुकी हैं और उन्होंने महाराज जी के कार्यों की सराहना की है । यह स्थान 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा और भारत को 'विश्वगुरु' बनाने के विचार-मंथन का भी केंद्र रहा है ।
श्री राजेंद्र दास जी महाराज न केवल एक आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि एक समाज सुधारक और सनातन धर्म के स्तंभ भी हैं। उन्होंने मलूक पीठ और रैवासा धाम जैसी ऐतिहासिक पीठों को न केवल संभाला है, बल्कि उन्हें आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिक बनाते हुए आध्यात्मिकता, शिक्षा और सेवा का एक जीवंत केंद्र बना दिया है।
श्री सीता राम जी
संवत 1570 (ईस्वी सन 1513)
श्री अग्रदेव जी महाराज